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मैंने 7 ब्लफ संकेत परखे: कौन से सच निकले, कौन से झूठ

तीन पत्ती में ब्लफ पकड़ने का सबसे भरोसेमंद तरीका किसी एक हाव-भाव को पढ़ना नहीं, बल्कि दांव के पैटर्न को संभावना से मिलाना है। 52 पत्तों की गड्डी में तीन पत्तों के कुल 22,100 संयोजन बनते हैं, और इनमें....

3 अक्टूबर 2026 5 min read Verified
मैंने 7 ब्लफ संकेत परखे: कौन से सच निकले, कौन से झूठ

मैंने 7 ब्लफ संकेत परखे: कौन से सच निकले, कौन से झूठ

तीन पत्ती में ब्लफ पकड़ने का सबसे भरोसेमंद तरीका किसी एक हाव-भाव को पढ़ना नहीं, बल्कि दांव के पैटर्न को संभावना से मिलाना है। 52 पत्तों की गड्डी में तीन पत्तों के कुल 22,100 संयोजन बनते हैं, और इनमें से लगभग 74.4 प्रतिशत हाथ सिर्फ हाई कार्ड होते हैं, जबकि ट्रेल यानी तीन एक जैसे पत्ते केवल 0.24 प्रतिशत बार आते हैं। इसलिए जो खिलाड़ी हर दूसरे राउंड में बड़ा रेज़ ठोके, उसके पास ट्रेल या सीक्वेंस होने की संभावना बहुत कम होती है। पत्ती की कहानी का सुझाव है कि हर राउंड में तीन चीज़ें दर्ज करें: दांव का आकार, चाल चलने में लगा समय और शोडाउन में खुले पत्ते। अगर किसी का रेज़ उसके शोडाउन से मेल नहीं खाता, तो वही उसका ब्लफ पैटर्न है। अगले खेल में इन तीनों संकेतों का हिसाब कॉपी पर रखकर शुरुआत करें।

आपने कितनी बार ऐसा देखा है कि सामने वाला दांव पर दांव ठोकता रहा, आपने "शायद ब्लफ है" सोचकर पैक नहीं किया, और अंत में उसके हाथ में ट्रेल निकल आया? या उलटा: आपने डरकर पत्ते फेंक दिए और उसने मुस्कुराकर अपने तीन बेमेल, बेकार पत्ते गड्डी में मिला दिए? मैंने बरसों तक यही मूर्खता की है, और हर बार जेब ने इसकी कीमत वसूली। असली समस्या यह नहीं कि ब्लफ पकड़ना कठिन है। समस्या यह है कि हम अंदाज़े को अनुभव समझ बैठते हैं। तो सवाल सीधा है: तीन पत्ती में ब्लफ कैसे पकड़ें, और वह भी किसी जादुई "टेल" के भरोसे बिना? जवाब तीन परिस्थितियों में बँटा है, और यही इस लेख की रीढ़ है। मैंने सात लोकप्रिय संकेतों को अपनी महफ़िलों में बार-बार परखा और नतीजा कड़वा रहा: चार संकेत काम के निकले, तीन सिर्फ़ किस्से। आगे सब खोलकर रखूँगा। यकीन करो या न करो, मेरा तो यही मानना है कि जो खिलाड़ी हिसाब नहीं रखता, वह दरअसल दान देने आया है।

friends seated around a low table in a living room playing teen patti, cards fanned in hand, evening lamplight

तीन पत्ती के नियम और हाथों का क्रम पहले से पक्का न हो, तो तीन पत्ती के नियम और हाथों का क्रम पढ़कर लौटिए। उसके बाद यह लेख दोगुना काम आएगा।

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अगर आप दोस्तों की महफ़िल में खेलते हैं और चेहरे पढ़ना चाहते हैं, तो क्या करें?

दोस्तों की महफ़िल में चेहरे के बजाय चाल की देरी और पत्ते देखने की आदत पर नज़र रखें। बार-बार पत्ते दोबारा देखना, अचानक चुप हो जाना या बहुत ज़्यादा बोलना कभी-कभी घबराहट बताता है, पर अकेले इन पर भरोसा न करें; पहले उस खिलाड़ी का सामान्य व्यवहार पहचानें।

यहाँ पहली सच्चाई कड़वी है: फ़िल्मों वाला "आँख नहीं मिला रहा, यानी ब्लफ" सिद्धांत महफ़िल में आधा ही चलता है। पोकर की दुनिया में ऐसे संकेतों को Tell (poker) - Wikipedia कहा जाता है। वहाँ भी सलाह यही है कि कोई संकेत तभी मायने रखता है जब वह उसी खिलाड़ी की आम आदत से अलग दिखे। यानी पहले पाँच-छह राउंड सिर्फ़ देखिए, खेलिए कम। जो आदमी हर हाथ में गाना गुनगुनाता है, उसका गुनगुनाना बंद होना संकेत है। जो हमेशा चुप रहता है, उसका अचानक बातूनी होना संकेत है। चेहरा देखकर निष्कर्ष निकालने वाले आप जैसे शौकिया जासूस अक्सर अपने ही जाल में फँसते हैं, क्योंकि चालाक खिलाड़ी जानबूझकर नकली "टेल" परोसते हैं। मेरे अपने अनुभव में पहले तीन संकेतों का हाल यह रहा:

  • संकेत 1, चाल में देरी (काम का): जो खिलाड़ी हमेशा तुरंत चाल चलता है और अचानक दस सेकंड सोचने लगे, वह या तो नाटक कर रहा है या सच में दुविधा में है। दोनों हालात में उस पर दबाव बनाना सस्ता पड़ता है।
  • संकेत 2, पत्ते बार-बार दोबारा देखना (किस्सा): कमज़ोर हाथ वाले भी यह करते हैं और नए खिलाड़ी भी। यह आदत है, सबूत नहीं।
  • संकेत 3, ज़रूरत से ज़्यादा बोलना (किस्सा): बातचीत मज़बूत हाथ को भी उतनी ही आसानी से छुपा लेती है। इसे हल्का इशारा मानिए, फ़ैसला नहीं।

इन संकेतों के साथ एक अनुशासन जोड़ लीजिए, वरना सब बेकार है। फ़ोन में हर विरोधी के नाम से एक छोटा नोट बनाइए और उसकी "सामान्य रफ़्तार" लिख लीजिए: कितनी जल्दी चाल चलता है, कितना बोलता है, कितनी बार पत्ते दोबारा उठाता है। छठे राउंड के बाद जब उसकी आदत से कोई चीज़ हटे, तब उसे संकेत गिनिए। बिना बेसलाइन के हर हरकत संकेत लगती है, और जब सब कुछ संकेत लगे तो कुछ भी संकेत नहीं रहता। यकीन करो या न करो, मेरा तो यही मानना है कि सबसे सस्ता कोर्स एक कॉपी और दस मिनट का धैर्य है।

close-up of a notebook with handwritten player notes beside a phone and a fan of playing cards

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अगर सामने वाला हर राउंड में दांव बढ़ाता है, तो उसका ब्लफ कैसे पकड़ें?

पहले देखें कि वह ब्लाइंड है या सीन, क्योंकि ब्लाइंड खिलाड़ी का रेज़ तकनीकी रूप से ब्लफ नहीं होता। सीन खिलाड़ी का रेज़ तब संदिग्ध है जब दांव पॉट के अनुपात में बेतुका हो और पिछले शोडाउन में उसके पत्ते कमज़ोर निकले हों।

यह वही बारीकी है जो ज़्यादातर लेख छोड़ देते हैं। ब्लाइंड खेलने वाले ने अपने पत्ते देखे ही नहीं, इसलिए उसे खुद नहीं पता कि उसका हाथ अच्छा है या बुरा। उसका रेज़ जुआ है, ब्लफ नहीं। ब्लफ सिर्फ़ वही कर सकता है जिसने पत्ते देखे हों और जानते हुए भी मज़बूत दिखने की कोशिश करे। तो हर रेज़ को एक ही तराज़ू में तौलना पहली गलती है। दूसरी गलती संभावनाओं को न जानना है। तीन पत्ती का विकिपीडिया पेज हाथों का क्रम बताता है, और 22,100 संभावित हाथों में उनका बँटवारा कुछ इस तरह बैठता है:

  • हाई कार्ड: 16,440 हाथ, यानी लगभग 74.39 प्रतिशत
  • पेयर: 3,744 हाथ, यानी लगभग 16.94 प्रतिशत
  • कलर: 1,096 हाथ, यानी लगभग 4.96 प्रतिशत
  • सीक्वेंस: 720 हाथ, यानी लगभग 3.26 प्रतिशत
  • प्योर सीक्वेंस: 48 हाथ, यानी लगभग 0.22 प्रतिशत
  • ट्रेल: 52 हाथ, यानी लगभग 0.24 प्रतिशत

इसका मतलब निकालिए। कलर या उससे ऊपर का हाथ सिर्फ़ करीब 8.7 प्रतिशत बार आता है, यानी हर 11-12 हाथों में एक। जब कोई सीन खिलाड़ी तीन-चार राउंड लगातार बढ़ाए, तो या वह उन दुर्लभ हाथों में से एक लेकर बैठा है, या वह ब्लफ कर रहा है। गणित आपके पक्ष में यह कहता है कि दूसरा विकल्प कहीं ज़्यादा संभावित है। हालाँकि पोकर की ब्लफ अवधारणा पर Bluff (poker) - Wikipedia का लेख दिखाता है कि ब्लफ सिर्फ़ तभी मुनाफ़ा देता है जब विरोधी पर्याप्त बार पैक करें। यही कसौटी आपके काम की है।

अब ज़रा हिसाब लगाइए, क्योंकि यह वह जगह है जहाँ महफ़िल के "उस्ताद" नंगे पकड़े जाते हैं। मान लीजिए पॉट में 100 रुपये हैं और विरोधी 50 रुपये का रेज़ करता है। उसका ब्लफ तभी बराबरी पर पहुँचता है जब आप 50 ÷ (100 + 50) यानी लगभग 33 प्रतिशत बार पैक करें। अगर वह पूरे 100 का दांव लगाए, तो उसे 50 प्रतिशत बार आपको भगाना पड़ेगा। इसलिए भारी दांव वाला खिलाड़ी या सच में मज़बूत है, या उसे मालूम है कि आप डरपोक हैं। अपने बारे में इस सच को स्वीकारिए, फिर कॉल या पैक कीजिए। इस हिस्से में बाकी दो संकेत ये रहे:

  • संकेत 4, दांव के आकार की असंगति (काम का): सीन खिलाड़ी का चाल आमतौर पर ब्लाइंड दांव का दोगुना होता है। जो अचानक इस सामान्य रेज़ के बजाय बेवजह बड़ा दांव दिखाए, वह अक्सर आपको भगाना चाहता है।
  • संकेत 5, रेज़ की आवृत्ति बनाम शोडाउन का इतिहास (काम का): जिसने पिछले तीन शोडाउन में हाई कार्ड दिखाए और फिर भी हर बार रेज़ किया, उसका अगला रेज़ भी उसी खाँचे में रखिए।

यकीन करो या न करो, मेरा तो यही मानना है कि संभावना की एक पर्ची किसी भी "छठी इंद्रिय" से ज़्यादा ईमानदार होती है।

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तीन पत्ती में बैंकरोल मैनेजमेंट और दांव का आकार

अगर आप मोबाइल ऐप पर खेलते हैं जहाँ चेहरा दिखता ही नहीं, तो क्या देखें?

ऐप पर आपके पास सिर्फ़ तीन डेटा बचते हैं: दांव का आकार, हर राउंड का इतिहास और शोडाउन के नतीजे। टाइमर और ऑटो-प्ले चाल की देरी का भरोसा तोड़ देते हैं, इसलिए संकेत नहीं, गिनती पर टिकें और अपने नोट्स रखें।

पहले एक ज़रूरी चेतावनी, वरना आप मुझे गैरज़िम्मेदार कहेंगे। भारत में असली पैसे वाले ऑनलाइन गेम पर कानूनी स्थिति 2025 के बाद सख़्त हुई है और राज्यों के हिसाब से भी अलग है। इसलिए रणनीति का अभ्यास मुफ़्त चिप्स वाले मोड या दोस्तों के बीच कीजिए, और खेलने से पहले आधिकारिक स्रोत से अपने राज्य की स्थिति जाँच लीजिए। अब काम की बात। ऐप में आपको चेहरा नहीं दिखता, पर आपको कुछ ऐसा मिलता है जो मेज़ पर नहीं मिलता: साफ़-सुथरा रिकॉर्ड। हर रेज़ का आकार, हर पैक का पल, हर शोडाउन। तीन पत्ती गोल्ड, रम्मीसर्किल या किसी भी भारतीय कार्ड ऐप में खिलाड़ी का इतिहास वही कहानी कहता है जो मेज़ पर चेहरा कहता था, बस ज़्यादा ईमानदारी से। इसके लिए यह तरीक़ा अपनाइए:

  1. हर शोडाउन के बाद विरोधी का हाथ वर्ग लिखिए: हाई कार्ड, पेयर, कलर या उससे ऊपर।
  2. उसी हाथ में उसके रेज़ गिनिए।
  3. दस शोडाउन जमा होने के बाद देखिए कि उसके कितने रेज़ हाई कार्ड या कमज़ोर पेयर पर खत्म हुए।
  4. अनुपात आधे से ऊपर हो, तो उसे "अधिक ब्लफ करने वाला" की श्रेणी में डाल दीजिए और कॉल का दायरा बढ़ाइए।

इसमें एक जाल है जो मैंने महँगा सीखा। शोडाउन में सिर्फ़ वही हाथ खुलते हैं जो आख़िर तक गए। जो हाथ पैक हो गए वे कभी नहीं दिखते। इसलिए आपका नमूना पक्षपाती है: शोडाउन में आपको मज़बूत हाथ ज़्यादा दिखेंगे, और ब्लफ करने वाले का असली अनुपात आपकी गिनती से ऊँचा ही होगा। यानी जिसे आप 40 प्रतिशत ब्लफर मान रहे हैं, वह शायद उससे ज़्यादा है। बाकी संकेतों का हिसाब यह रहा:

  • संकेत 6, ऐप पर चाल की गति (किस्सा): टाइमर, इंटरनेट की देरी और ऑटो-प्ले के कारण यह लगभग बेकार है।
  • संकेत 7, शोडाउन के बाद की प्रतिक्रिया और मिलान (काम का): जिसने बिना देखे या कमज़ोर हाथ पर बड़ा दांव लगाया था, उसे दर्ज कीजिए। अगला मौका आए तो वही पैटर्न दोहराया जाता है।

a smartphone screen showing a teen patti app table with stacked chips and player avatars, held over a notebook

पत्ती की कहानी पर हम तीन पत्ती गोल्ड, रम्मीसर्किल और अंक रम्मी जैसे ऐप के गेमप्ले को इसी नज़र से देखते हैं: रिकॉर्ड पहले, भावना बाद में। इसी कारण भारतीय कार्ड गेम ऐप की निष्पक्ष समीक्षा हम अलग से पढ़ने की सलाह देते हैं।

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कौन-सी आम गलतियाँ आपका ब्लफ पकड़ने का हुनर बर्बाद करती हैं?

सबसे आम गलतियाँ हैं: एक झलक पर फैसला करना, हर रेज़ को ब्लफ मान लेना, शोडाउन के नमूने का पक्षपात भूल जाना और हारने के बाद गुस्से में कॉल करना। ये चारों मिलकर आपकी बैंकरोल उतनी ही तेज़ खाती हैं जितना कोई ट्रेल।

आइए एक-एक करके देखें कि आप कहाँ अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारते हैं। पहली गलती: दो राउंड देखकर "इसकी आदत समझ आ गई" कह देना। दो राउंड कोई नमूना नहीं, इत्तफ़ाक़ है। दूसरी: हर बड़े दांव को ब्लफ मान लेना। चूँकि 74.4 प्रतिशत हाथ हाई कार्ड हैं, ब्लफ आम है, पर हर बार नहीं। जिस खिलाड़ी ने पिछले तीन में से दो शोडाउन में कलर या ऊपर दिखाया, उसे ब्लफर मत मानिए। तीसरी: नकली टेल के जाल में फँसना। अनुभवी खिलाड़ी जानबूझकर काँपते हाथ और गहरी साँस दिखाकर आपको कॉल करवाते हैं। चौथी: हारने के बाद "इस बार तो पकड़ ही लूँगा" वाली ज़िद, जिसे लोग बदला कहते हैं और बैंकरोल हार कहती है। पाँचवीं, और सबसे महँगी: बेसलाइन के बिना संकेत पढ़ना। जिसे आप आज घबराहट समझ रहे हैं, हो सकता है वह उसकी हर रोज़ की आदत हो। इन्हें दूर करने की सबसे सीधी तरकीब है कि हर सत्र की शुरुआत में अपने लिए एक सीमा तय कीजिए: कितना हारने पर उठ जाना है। यकीन करो या न करो, मेरा तो यही मानना है कि ब्लफ पकड़ने से पहले अपना गुस्सा पकड़ना सीखना चाहिए, वरना सारी रणनीति बेकार है।

30 दिन बाद आपकी जाँच-सूची कैसी दिखनी चाहिए?

30 दिन में कम से कम 15 सत्र खेलें, हर सत्र में लगभग 20 हाथ दर्ज करें और हर नियमित विरोधी का एक नोट बनाएँ। चौथे सप्ताह तक आपकी गलत "यह ब्लफ है" पुकारें पहले सप्ताह की तुलना में घटकर करीब आधी रह जानी चाहिए। यही असली प्रगति है।

यानी कुल मिलाकर लगभग 300 हाथों का रिकॉर्ड, जो किसी भी अंदाज़े से बेहतर है। इसे हफ़्तों में बाँट लीजिए ताकि भारी न लगे:

  1. सप्ताह 1: सिर्फ़ देखिए और बेसलाइन लिखिए। लक्ष्य जीतना नहीं, नमूना जमा करना है।
  2. सप्ताह 2: दांव का आकार और रेज़ की आवृत्ति जोड़िए, और ऊपर वाली संभावना तालिका के हिसाब से अपनी कॉल जाँचिए।
  3. सप्ताह 3: शोडाउन का इतिहास मिलाइए और नमूने के पक्षपात का सुधार लगाइए।
  4. सप्ताह 4: अपनी गलत कॉल गिनिए। किसने आपको मूर्ख बनाया और क्यों, यह लिखिए।

दिन 30 पर तीन सवाल पूछिए। क्या आपने किसी एक संकेत के भरोसे कोई बड़ी कॉल की? क्या आपके नोट्स में कम से कम तीन विरोधियों के पैटर्न साफ़ दर्ज हैं? और क्या आपकी हार बजट के भीतर रही? अगर तीनों जवाब "हाँ" हैं, तो आप सही दिशा में हैं। अगर नहीं, तो गलती आपके पत्तों में नहीं, आपकी आदतों में है। मैंने अपने सबसे बुरे दौर में यही पाया था, और यह जानना जेब पर सबसे सस्ता सबक था।

निष्कर्ष: ब्लफ पकड़ना हुनर नहीं, हिसाब है

सात संकेतों में से चार, यानी चाल की देरी, दांव के आकार की असंगति, रेज़ बनाम शोडाउन का इतिहास और शोडाउन के बाद का मिलान, टिके रहे। चेहरे का नाटक, पत्ते बार-बार देखना और ऐप पर चाल की गति किस्से निकले। जिसने 22,100 हाथों का गणित समझ लिया और अपना नोट रखने की आदत डाल ली, वह महफ़िल में उन "उस्तादों" से आगे निकल जाता है जो आँखें पढ़ने का दावा करते हैं। इसलिए आज से अंदाज़ा कम और रिकॉर्ड ज़्यादा रखिए, और खेल को हमेशा बजट के भीतर रखिए। पत्ती की कहानी पर आप रणनीति गाइड, ऐप समीक्षा और गेमप्ले निर्देशों के साथ यह सफ़र आगे बढ़ा सकते हैं। यकीन करो या न करो, मेरा तो यही मानना है कि जो हारना सीख गया, वही सबसे आख़िर में हारता है।

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a calm veteran card player reviewing a handwritten score sheet at a wooden table with a cup of chai

तीन पत्ती की रणनीति गाइड: शुरुआती से उन्नत तक

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q: तीन पत्ती में ब्लफ क्या होता है?

A: ब्लफ का मतलब है कमज़ोर पत्ते लेकर इस तरह दांव लगाना कि विरोधी आपको मज़बूत हाथ वाला समझकर पैक कर दे। तीन पत्ती में लगभग 74.4 प्रतिशत हाथ हाई कार्ड होते हैं, इसलिए ब्लफ खेल का स्वाभाविक हिस्सा है। ध्यान रहे कि सिर्फ़ वही खिलाड़ी ब्लफ कर सकता है जिसने पत्ते देख लिए हों; ब्लाइंड खिलाड़ी का रेज़ तकनीकी रूप से ब्लफ नहीं माना जाता।

Q: तीन पत्ती में ब्लफ पकड़ने की शुरुआत कैसे करें?

A: शुरुआत हर विरोधी का "सामान्य व्यवहार" लिखने से करें। पहले पाँच-छह राउंड सिर्फ़ देखिए: वह कितनी जल्दी चाल चलता है, कितने आकार के दांव लगाता है और कितनी बार रेज़ करता है। उसके बाद ही किसी बदलाव को संकेत मानिए। 30 दिन में लगभग 15 सत्र और 300 हाथ दर्ज करने का लक्ष्य रखें, ताकि आपका नमूना किसी इत्तफ़ाक़ पर आधारित न रहे।

Q: हाव-भाव पढ़ना बेहतर है या संभावना का गणित?

A: संभावना और दांव के पैटर्न ज़्यादा भरोसेमंद हैं, जबकि हाव-भाव सिर्फ़ सहायक संकेत हैं। हाव-भाव तभी काम आते हैं जब वे उसी खिलाड़ी की सामान्य आदत से हटें, और चालाक खिलाड़ी नकली टेल भी दिखा सकते हैं। गणित झूठ नहीं बोलता: कलर या उससे ऊपर का हाथ सिर्फ़ करीब 8.7 प्रतिशत बार आता है, इसलिए लगातार बड़े रेज़ अक्सर संदिग्ध होते हैं।

Q: ब्लफ समझकर कॉल किया और फिर भी हार गया, तो गलती कहाँ हुई?

A: ज़रूरी नहीं कि गलती हुई हो, क्योंकि सही कॉल भी कई बार हारती है। पहले जाँचिए कि आपने सिर्फ़ एक संकेत पर भरोसा किया था या दांव का आकार, रेज़ की आवृत्ति और शोडाउन का इतिहास तीनों देखे थे। अगर तीनों ब्लफ की ओर इशारा कर रहे थे और फिर भी वह सच में मज़बूत निकला, तो वह 8.7 प्रतिशत वाला दुर्लभ मामला था। उसे नोट कर लीजिए और आगे बढ़ जाइए।

Q: क्या ब्लफ पकड़ने का अभ्यास करने के लिए पैसे लगाने पड़ते हैं?

A: नहीं, अभ्यास के लिए असली पैसे लगाना ज़रूरी नहीं है। दोस्तों के साथ बिना पैसे या मुफ़्त चिप्स के साथ खेलकर वही नोट्स, वही संभावना और वही पैटर्न सीखे जा सकते हैं। असली पैसे वाले ऑनलाइन गेम पर भारत में 2025 के बाद कानूनी स्थिति सख़्त और राज्यों के हिसाब से अलग है, इसलिए खेलने से पहले आधिकारिक स्रोत से जाँच ज़रूर करें।

Q: मोबाइल ऐप पर विरोधी का ब्लफ पकड़ना संभव है?

A: हाँ, पर चेहरे के बजाय रिकॉर्ड के सहारे। ऐप में टाइमर और ऑटो-प्ले चाल की गति का भरोसा तोड़ देते हैं, इसलिए दांव के आकार, रेज़ की संख्या और शोडाउन के नतीजे दर्ज कीजिए। दस शोडाउन के बाद अनुपात निकालिए, और याद रखिए कि पैक हुए हाथ कभी नहीं दिखते, इसलिए असली ब्लफ दर आपकी गिनती से अक्सर ऊँची होती है।

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